मध्य प्रदेश का e-Khasra देखने के लिए webgis2.mpbhulekh.gov.in पर जाकर “भू-अभिलेख” चुनें, फिर जिला, तहसील, ग्राम और भूमिस्वामी का नाम या सर्वे नंबर भरें। इसके लिए रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है। बैंक या कोर्ट के काम के लिए लॉगिन करके शुल्क देकर प्रमाणित प्रतिलिपि ली जाती है।
यह गाइड केवल मध्य प्रदेश के लिए है। उत्तर प्रदेश का e-Khasra पोर्टल अलग है और उसका पता ekhasra.up.gov.in है।

खसरा क्या होता है?
पोर्टल के अनुसार खसरा वह रिकॉर्ड है जिसमें भूमि का विवरण होता है, जैसे सर्वे नंबर, नाम, पिता का नाम, पता, मिट्टी का प्रकार, भू-राजस्व, फसल और सिंचाई के स्रोत। भूमि अभिलेखों का रखरखाव कृषि वर्ष के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक रूप से किया जाता है।

खसरा नंबर क्या होता है?
खसरा नंबर जमीन के टुकड़े की पहचान का नंबर है। WebGIS 2.0 के खोज फॉर्म में इसे “सर्वेक्षण / ब्लॉक संख्या” के रूप में चुना जाता है। यह नंबर आपको पुराने खसरे की नकल या भू-अधिकार पुस्तिका में मिल सकता है। नंबर पता न हो तो आप भूमिस्वामी के नाम से भी खोज सकते हैं।
खसरा, खतौनी और बी-1 में क्या अंतर है?
खसरा जमीन के टुकड़े का विवरण बताता है। बी-1 धारकवार राजस्व संग्रह रजिस्टर है, यानी इसमें जानकारी भूमि धारक के हिसाब से होती है, और यह हर साल बनता है। भू-नक्शा गांव के सर्वे और भूखंड क्रमांकों का मानचित्र है।

MP का e-Khasra मुफ्त में कैसे देखें?
- webgis2.mpbhulekh.gov.in खोलें।
- होम पेज पर “भू-अभिलेख” चुनें।
- “क्या आप खसरा के लिए भूमि रिकॉर्ड खोजना चाहते हैं?” के सामने “हाँ” पर क्लिक करें।

- जिला, तहसील और ग्राम चुनें। ग्राम को LGD कोड से भी चुना जा सकता है।
- भूमिस्वामी नाम, सर्वेक्षण/ब्लॉक संख्या या प्लॉट संख्या चुनें।
- कैप्चा भरें और “विवरण देखें” पर क्लिक करें।
- “कार्यवाही” कॉलम के थ्री-डॉट मेनू से “खसरा देखें” चुनें। यहीं “खतौनी B1 देखें” और “नक्शा देखें” के विकल्प भी मिलते हैं।
खसरा खोजने के कितने तरीके हैं?
पोर्टल के फॉर्म में 6 तरीके हैं। जिला, तहसील और ग्राम के नीचे भूमिस्वामी नाम, सर्वेक्षण/ब्लॉक संख्या और प्लॉट संख्या के विकल्प हैं। भूखंड ID, ULPIN और भूमिस्वामी समग्र संख्या के लिए फॉर्म में ऊपर अलग खाने हैं।

नाम से खसरा खतौनी कैसे निकालें?
जब खसरा नंबर पता न हो, तब जिला, तहसील और ग्राम चुनने के बाद “भूमिस्वामी नाम” पर क्लिक करें। सूची से नाम चुनकर कैप्चा भरें और “विवरण देखें” पर क्लिक करें। नाम उसी तरह चुनें जैसा रिकॉर्ड में दर्ज है, क्योंकि एक गांव में मिलते-जुलते नाम हो सकते हैं।
भू-नक्शा कैसे देखें?
होम पेज पर “भू-भाग नक्शा” चुनें। पॉप-अप में “क्या आप ग्रामवार पार्सल मानचित्र देखना चाहते हैं?” के सामने “हाँ” पर क्लिक करें। नक्शा पेज पर “ग्राम चयन करें” से गांव चुनें और “भूखंड खोजें” से अपना भूखंड देखें।


खसरे की प्रमाणित नकल कैसे निकालें?

पोर्टल की Certified Copy पुस्तिका के अनुसार पूरा तरीका यह है:
- पोर्टल पर साइन इन करें। अकाउंट नहीं है तो पहले पंजीकरण करें।
- मेनू में “प्रमाणित प्रति” और फिर “भू-अभिलेख प्रतिलिपि” पर क्लिक करें। OK दबाकर “नवीन आवेदन” चुनें।
- जिला, तहसील और ग्राम चुनें। भूमिस्वामी या सर्वेक्षण/ब्लॉक संख्या चुनकर “विवरण देखें” पर क्लिक करें।
- सर्वेक्षण संख्या चुनें, फिर अभिलेख प्रकार और वर्ष चुनकर “सूची में जोड़ें” पर क्लिक करें।
- “शुल्क गणना करें” पर क्लिक करें और “हाँ” चुनें। आवेदन संख्या बन जाएगी। OK दबाएं।
- “आगे बढ़ें” पर क्लिक करें। आवेदन संख्या सूची में जुड़ जाएगी।
- “कार्यवाही” में “भुगतान” चुनें। शुल्क देखकर “आगे बढ़ें” पर क्लिक करें, विवरण भरें और “मेक पेमेंट” से भुगतान करें।
- आवेदन की रसीद प्रिंट करें और OK दबाएं।
- आवेदन संख्या के कार्यवाही मेनू से “प्रतिलिपि डाउनलोड” और फिर “डाउनलोड प्रमाणित प्रतिलिपि” चुनें।
एक ही आवेदन में क्रम से कई अभिलेख जोड़े जा सकते हैं। इसी विकल्प से खसरा, खतौनी, नक्शा, खातावार खसरा, भू-अधिकार पुस्तिका और प्रभार प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रतिलिपि मिलती है। होम पेज पर “भू-अभिलेख” चुनने पर चालू वर्ष और पिछले वर्ष की डिजिटल हस्ताक्षरित खसरा प्रतिलिपि का अलग विकल्प भी दिखता है।
साधारण खसरा और प्रमाणित नकल में क्या अंतर है?

साधारण खसरा जानकारी के लिए होता है और इसके लिए शुल्क या लॉगिन नहीं चाहिए। प्रमाणित नकल डिजिटल हस्ताक्षरित होती है और इसकी राशि पोर्टल की “शुल्क गणना” में दिखती है। आवेदन से पहले संबंधित बैंक या कार्यालय से पूछ लें कि उन्हें किस तरह की नकल चाहिए।
क्या मोबाइल पर भी नकल मिलती है?
पोर्टल पर M.P. Bhulekh एंड्रॉइड ऐप की प्रमाणित प्रतिलिपि वाली पुस्तिका है। ऐप के होम पेज पर भी भू-अभिलेख से खसरा, नक्शा और खतौनी देखी जा सकती है। समाचार रिपोर्ट के अनुसार ऐप से प्रमाणित खसरा व्हाट्सऐप पर लिया जा सकता है, और 181 पर कॉल करके भी खसरा-खतौनी की नकल SMS या व्हाट्सऐप से मंगाई जा सकती है। इन दोनों के लिए पहले पोर्टल पर ताजा जानकारी देख लें।
पुराना खसरा या पुराना रिकॉर्ड कहां मिलेगा?
होम पेज पर “अभिलेखागार दस्तावेज़ (स्कैन)” से चुने गए गांव के पुराने रिकॉर्ड खोजे और देखे जा सकते हैं। इनकी प्रमाणित प्रतिलिपि के लिए “प्रमाणित प्रति” मेनू में “अभिलेखागार प्रतिलिपि” का विकल्प है। जो सर्वे नंबर अब चालू नहीं है, उसके लिए “निष्क्रिय सर्वे सं. प्रतिलिपि” का विकल्प है।
नामांतरण के बाद खसरे में नाम कैसे बदलता है?
नामांतरण का मतलब है भू-अभिलेखों में दर्ज नाम की जगह विधिक रूप से किसी अन्य व्यक्ति का नाम लिखा जाना। पोर्टल के FAQ के अनुसार:
- नामांतरण के आधार: उत्तराधिकार या कौटुम्बिक व्यवस्था, क्रय-विक्रय या डिक्री, दत्तक या दान, नीलामी, फोती, बंधक पत्र, भू-अर्जन या भू-आवंटन, वसीयत और हक त्याग।
- दस्तावेज़ आधार के अनुसार लगते हैं, जैसे खसरा और B1 की प्रतिलिपि, भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका, विक्रय पत्र, डिक्री, वसीयत, दान पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र या बंधक पत्र।
- नामांतरण के लिए कोई शुल्क नहीं है।
- अविवादित नामांतरण की समय सीमा 45 दिन है।
अनुरोध करने पर सिस्टम एक अनुरोध संख्या बनाता है। इस संख्या से होम पेज पर देखा जा सकता है कि आवेदन किस स्तर पर है।
खसरा नहीं मिल रहा हो तो क्या करें?
- जिला, तहसील और गांव का नाम दोबारा जांचें।
- नाम से न मिले तो सर्वे या प्लॉट नंबर से खोजें।
- हाल के नामांतरण या बंटवारे के बाद रिकॉर्ड अपडेट होने में समय लग सकता है।
- रिकॉर्ड में गलती हो तो पोर्टल के “शिकायत” सेक्शन में शिकायत दर्ज करें। मिली हुई शिकायत आईडी से आप उसे ट्रैक कर सकते हैं।
- हेल्पडेस्क: 18002030311 (टोल फ्री), सुबह 9:45 से शाम 6:15, ईमेल support.gis@begl.org.in।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या e-Khasra देखना मुफ्त है? हां, साधारण खसरा देखने का कोई शुल्क नहीं है।
क्या बिना रजिस्ट्रेशन खसरा देख सकते हैं? हां। पोर्टल के अनुसार खसरे का विवरण देखने के लिए रजिस्टर करने की जरूरत नहीं है।
क्या मोबाइल से खसरा देख सकते हैं? हां। पोर्टल मोबाइल ब्राउज़र में खुलता है, और M.P. Bhulekh ऐप में भी भू-अभिलेख की सुविधा है।
क्या खसरा नंबर के बिना जमीन का रिकॉर्ड मिल सकता है? हां। भूमिस्वामी के नाम, प्लॉट संख्या, भूखंड ID, ULPIN या समग्र संख्या से भी खोज सकते हैं।
प्रमाणित नकल का शुल्क कितना है? राशि आवेदन के समय पोर्टल की “शुल्क गणना” में दिखती है। हमने यहां कोई राशि नहीं लिखी, क्योंकि पोर्टल के जिन पेजों को हमने देखा उनमें तय राशि नहीं मिली।
क्या यह वेबसाइट खसरा निकालकर देती है? नहीं। खसरा आपको सरकारी पोर्टल से खुद देखना या निकालना होगा।
आगे पढ़ें: MP Bhulekh eKYC गाइड और WebGIS 2.0 गाइड।
